Tuesday, September 26, 2023
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बिहार के शिक्षकों को नहीं भा आ रही वेतन वृद्धि, जुमला और झुनझुना कह रहे लोग

बिहार में चुनाव काफी नजदीक है और बिहार सरकार इलेक्शन मोड में आ गई है
बिहार में पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों  को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नई सेवाशर्त नियमावली के साथ ही वेतन वृद्धि को मंजूरी दी गई है.

बिहार के नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयध्यक्षों के वेतन में वृद्धि की घोषणा करने के साथ ही उनके लिए नई सेवा शर्त नियामवली को पारित कर दिया. बिहार सरकार के इस फैसले से लगभग पौने चार लाख नियोजित शिक्षकों को फायदा मिलेगा।,लेकिन इसका लाभ लेने से पहले शिक्षकों ने इसे चुनावी जुमला और लॉलीपाप की संज्ञा दे डाली है. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लिए गए नीतीश सरकार के इस बड़े को नियोजित शिक्षकों का सभी संघ पसंद नहीं कर रहा है और वो इस वेतन वृद्धि को भी उंट के मुंह में जीरा बता रहा है.

सीएम-डिप्टी सीएम का फूकेंगे पुतला

बिहार सरकार के इस निर्णय के बाद तो टीईटी, एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ ने कला दिवस के दिन पूरे राज्य में सीएम, डिप्टी सीएम का पुतला और नई सेवाशर्त नियमावली की प्रति जलाने का एलान किया है. शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने चुनावी लॉलीपॉप देकर उनके साथ छलावा किया है. बिहार के शिक्षकों को न तो राज्यकर्मी, न सहायक शिक्षक का दर्जा दिया गया है और न ही उनको पूर्ण वेतनमान का लाभ मिला है. शिक्षक हमेशा खुश रहते हैं लेकिन उन्हें जबरन खुश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

पांच साल में बढ़ा 60 फीसदी वेतन !शिक्षकों का कहना है कि नीतीश जी ने तो हमे चिढ़ाने का काम किया है. सेवा शर्त पढ़ने से ही सारी बातें स्पष्ट हो जा रही हैं. शिक्षकों के इस आरोप के बीच सरकार का दावा है कि पांच सालों में 60 प्रतिशत वेतन वृद्धि की गई है. विभाग के वरीय अधिकारी आरके महाजन के मुताबिक एक जुलाई 2015 में इन शिक्षकों के लिए वेतनमान लागू किया गया. उस समय 20 प्रतिशत वेतन वृद्धि की गई. 2017 में सातवें वेतनमान के अनुरूप 17 प्रतिशत की वेतन वृद्धि की गई. वर्तमान में ईपीएफ को मिलाकर करीब 20 प्रतिशत की वेतन वृद्धि की जा रही है. इस प्रकार पांच सालों में 60 प्रतिशत वेतन बढ़ा है.

मंगलवार को कैबिनेट से मिली है मंजूरी

ज्ञात हो कि मंगलवार की शाम सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने नई सेवाशर्त नियमावली को मंजूरी दे दी. इसका सीधा फायदा अब बिहार के साढे तीन लाख से अधिक शिक्षकों को होगा. शिक्षकों के मूल वेतन में जहां 15 फीसदी की वृद्धि होगी तो वहीं उनको अब कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) का लाभ भी मिलेगा. सरकार शिक्षकों को सितंबर, 2020 से ही ईपीएफ का लाभ देगी, जबकि मूल वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि का लाभ 1 अप्रैल 2021 से मिलेगा.

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