सवालों के घेरे में पप्पू यादव की गिरफ्तारी:वारंट के बाद पप्पू यादव ने मधेपुरा से चुनाव लड़ा, जिस थाने में केस दर्ज था वहां भी चुनाव प्रचार किया, तब क्यों नहीं किया गिरफ्तार

कोरोना महामारी के दौरान अस्पताल से लेकर श्मशान तक किसी मसीहा की तरह पीड़ितों के बीच सेवा के लिए मौजूद रहने वाले जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पूर्व सांसद राजेश यादव उर्फ पप्पू यादव को पटना पुलिस ने मधेपुरा पुलिस को मंगलवार को शाम को सौंप दिया। मधेपुरा के एसीजेएम-1 की कोर्ट से उनके खिलाफ 32 वर्ष पुराने एक अपहरण के मामले में उनका बेल टूट गया था, जिसके बाद 22 मार्च में वारंट जारी किया गया था। हालांकि इस मामले की गूंज विधानसभा चुनाव के दौरान भी उठी थी। उन्हें गिरफ्तार करने की पुलिस ने पूरी तैयारी कर रखी थी, लेकिन इसकी भनक लगने के बाद पूर्व सांसद को पूर्व निर्धारित तिथि को सदर विधानसभा से नामांकन करने की अपनी तिथि बदलनी पड़ी।

अगले दिन चुनाव आयोग के तकनीकी नियम का लाभ लेते हुए उन्होंने नामांकन दाखिल किया था। हालांकि चुनाव का समय नजदीक आने पर वे प्रचार करने मधेपुरा भी आए थे, लेकिन तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। शायद गिरफ्तारी से पूर्व सांसद को चुनाव में सहानुभूति का लाभ मिल जाता, इसलिए पुलिस उनकी सभाओं में तो मौजूद थी, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया। जबकि पूर्व सांसद अपने प्रत्याशी ई. प्रभाष की चुनावी सभा को संबोधित करने उसी मुरलीगंज भी गए थे, जहां के थाने में उनके खिलाफ केस भी दर्ज था। ऐसे में इस समय जबकि पूर्व सांसद लागतार कोरोना पीड़ितों की दवा से लेकर अन्य तरह की मदद कर रहे हैं, मधेपुरा से पुलिस को पटना भेजकर उन्हें गिरफ्तार किए जाने को जाप कार्यकर्ता समेत विपक्षी दल राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी की खबर के बाद जिले में सभी जगह जाप कार्यक्रताओं ने विरोध जताया।

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पहले से गिरफ्तारी की योजना थी

पप्पू यादव को गिरफ्तार करने की पटकथा रविवार की रात को ही लिखी गई थी। दरअसल, सोमवार की अहले सुबह पूर्व सांसद पप्पू यादव को सिंहेश्वर में निजी कार्यक्रम में आना था। वे यहीं से लौट भी जाते। जिसके लिए वे रविवार की रात दो बजे पटना से निकलते। इसे देखते हुए उनके पीए ने रूट के जिलों के डीएम और एसपी को पत्र लिखकर सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की थी। लेकिन देर रात को ही उन्होंने अपना सिंहेश्वर आने का कार्यक्रम रद्द कर दिया। बावजूद प्रशासन टोह लेती रही। पुलिस-प्रशासन को आशंका थी कि संभव है कि पूर्व सांसद बिना सुरक्षा के भी शार्टकट रास्ते से सिंहेश्वर आ सकते हैं। सुबह में भी पुलिस चौकन्ना थी। गम्हरिया में मधेपुरा-सुपौल जिला की सीमा चेकपोस्ट पर खुद एसपी भी लाव-लश्कर के साथ सुबह में पहुंचे। मंगलवार को जब उन्हें पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया तो मधेपुरा से उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ सतीश कुमार के नेतृत्व में कुमारखंड थाने की पुलिस को वहां भेजा गया, जिन्हें शाम को पटना पुलिस ने पूर्व सांसद सौंप दिया।

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जेल में रहना पड़ सकता है पूर्व सांसद को

दरअसल 1989 में मुरलीगंज थाना में रामकुमार यादव के अपहरण के आरोप में पप्पू यादव के खिलाफ कांड संख्या- 09 /89 दर्ज कराया था। वक्त के साथ सियासत में पप्पू यादव ने कई सफलताएं अर्जित कीं। विवादों में भी रहे। लिहाजा पप्पू यादव के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए। सूत्रों की मानें तो इस कांड में पप्पू यादव को पहले जमानत मिली थी, लेकिन सुनवाई में भाग नहीं लेने की वजह से यादव की जमानत को रद्द करते हुए उन्हें फरार घोषित कर दिया गया। इस मामले में हालिया एसीजीएम 1 मधेपुरा द्वारा 22 मार्च 2021 को पप्पू यादव के खिलाफ कुर्की-जब्ती की कार्रवाई का भी आदेश निर्गत किया गया है। चूंकि पप्पू यादव का पैतृक निवास कुमारखंड थाना क्षेत्र के खुर्दा गांव में है लिहाजा वारंट और कुर्की -जब्ती का आदेश कुमारखंड थाना को ही भेजा गया और कुमारखंड पुलिस द्वारा ही गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। जानकर बताते हैं कि कोर्ट बंद है तो जमानत में परेशानी होगी। चूंकि मामला 32 वर्ष पुराना है। इसमें अब मुकदमे का निपटारा या निर्णय के बाद ही उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है।

 

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