कोरोना वैक्सीन की मिक्सिंग क्यों: क्या संक्रमण को हराने में ज्यादा कारगर होगी वैक्सीनों की मिक्सिंग? जानिए इस पर हुई रिसर्च के नतीजे और भारत का स्टैंड

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18 घंटे पहले

दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन की मिक्सिंग पर बहस चल रही है। कुछ देशों में वैक्सीनों को मिलाने का फैसला वैक्सीन सप्लाई में देरी और सुरक्षा को देखते हुए लिया गया है। ऐसे में वैक्सीन मिक्सिंग को एक विकल्प के तौर पर देखा गया। इस पर शुरुआती रिसर्च और स्टडी हुई है। अभी काफी डेटा आना बाकी भी है।

वैक्सीन मिक्सिंग पर क्या कहती हैं स्टडी और इससे जुड़े फैक्ट्स…

अभी कहां-कहां वैक्सीन मिक्सिंग की प्रॉसेस चल रही है?

ब्रिटेन, कनाडा, इटली और सउदी अरब में वैक्सीन मिक्सिंग की मंजूरी दी गई है। यहां के वैज्ञानिकों का मानना है कि वैक्सीन मिक्सिंग कोरोना से लड़ाई में फायदेमंद है। जून में ही इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रागी (73) कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज फाइजर-बायोएनटेक की ली थी। उन्होंने पहली डोज एस्ट्राजेनेका की ली थी। इसी तरह एस्ट्राजेनेका की पहली डोज लेने वाली जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने दूसरी डोज मॉडर्ना की ली थी। बहरीन, चीन, स्वीडन, फ्रांस, नार्वे, दक्षिण कोरिया, स्पेन और चीन में भी वैक्सीन मिक्सिंग पर टेस्ट चल रहे हैं।

इनके अलावा अमेरिका में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ने हाल ही में बूस्टर डोज की मिक्सिंग का ट्रायल शुरू किया है। रूस के वैज्ञानिक स्पुतिक-V और एस्ट्राजेनेका के कॉम्बिनेशन पर स्टडी कर रहे हैं।

साइंटिस्ट वैक्सीन मिक्सिंग के बारे में क्या कहते हैं?
कोरोना के मामले में ही वैक्सीन मिक्सिंग के विकल्प पर बात नहीं चल रही है। इससे पहले वैज्ञानिक इबोला और दूसरी बीमारियों में भी वैक्सीन मिक्सिंग का प्रयोग कर चुके हैं। रोटावायरस वैक्सीन का कॉम्बिनेशन भारत में भी इस्तेमाल किया जा चुका है। वैज्ञानिक कहते हैं कि लोगों को अलग-अलग वैक्सीन का कॉम्बिनेशन दिए जाने से इम्यून रेस्पॉन्स ज्यादा मजबूत होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अलग-अलग वैक्सीन इम्यून सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों पर प्रभाव डालती हैं और ऐसे में इम्यून सिस्टम में वायरस के अलग-अलग हिस्सों को पहचानने की क्षमता विकसित होती है।

अमेरिका में वेल कॉर्नेल मेडिसिन के वायरोलॉजिस्ट जॉन मूर कहते हैं कि अभी इस बात पर बहस है कि दो वैक्सीन मिलकर तीसरी बन जाती हैं। कोरोना के मामलों में इस बहस के लिए अभी और वास्तविक आंकड़ों की जरूरत है। कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के इम्यूनोलॉजिस्ट झाऊ जिंग कहते हैं कि वैक्सीनों की मिक्सिंग और मैचिंग हमें उस स्थिति में सहूलियत देती है, जब वैक्सीन सप्लाई में देरी हो रही हो या फिर इनकी किल्लत हो।

वैक्सीन की मिक्सिंग पर डेटा क्या कहता है?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में एक स्टडी की गई, जिसका नाम Com-COV था। इसमें सामने आए डेटा राहत भरे हैं। इनमें जिन लोगों को एस्ट्राजेनेका के बाद फाइजर का शॉट दिया गया, उनमें इम्यून रेस्पॉन्स ज्यादा बेहतर पाया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि कोरोना के किसी भी स्ट्रेन के खिलाफ दो वैक्सीन की मिक्सिंग से ज्यादा एंटीबॉडी पैदा हुईं। हालांकि, इस स्टडी को लीड करने वाले साइंटिस्ट मैथ्यू स्नैप कहते हैं कि इन डेटा के आधार पर वैक्सीनेशन प्रोग्राम में फ्लैक्सिबिलिटी आ सकती है। पर अभी हमारे पास इतना ज्यादा डेटा भी नहीं है कि वैक्सीनेशन ड्राइव में जो प्रॉसेस अपनाई जा रही है, उसे बड़े पैमाने पर शिफ्ट करने की बात कही जा सके।

स्नैप ने कहा, ‘वैक्सीन मिक्सिंग से एंटी-बॉडी और टी-सेल्स का रेस्पॉन्स बेहतर दिख रहा है, ये निश्चित तौर पर उत्साह बढ़ाने वाली बात है। हालांकि, मुझे लगता है कि हमें अभी पहले वाली व्यवस्था में रहना चाहिए, जब तक कि इसे बदलने का ऐसा दूसरा बेहतर कारण नहीं मिलता जो नतीजों से साबित हो चुका हो।”

स्पेन के रिसर्चर्स ने एक स्टडी की और कहा कि जिन लोगों ने पहली डोज एस्ट्राजेनेका की ली और दूसरी फाइजर की, उनका इम्यून रेस्पॉन्स ज्यादा मजबूत हुआ है।

क्या ऐसी मिक्सिंग सुरक्षित है?
ऑक्सफोर्ड की Com-COV स्टडी के मुताबिक, वैक्सीन मिक्सिंग पर कुछ मामूली साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसे बुखार, सिरदर्द और थकान पर ये काफी हल्के होंगे। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन्हें ये साइड इफेक्ट्स हुए, उनमें से ज्यादातर में ये 48 घंटे में ही खत्म हो गए। ऐसा भी हो सकता है कि कम समय के लिए रहने वाले ये साइड इफेक्ट मजबूत इम्यून रेस्पॉन्स के लक्षण हों।

भारत का वैक्सीन मिक्सिंग पर क्या स्टैंड है?
भारत में हेल्थ मिनिस्ट्री की गाइडलाइन कहती है कि जिस वैक्सीन का पहला डोज लिया है, उसका ही दूसरा डोज लेना होगा। अगर समान वैक्सीन का दूसरा डोज उपलब्ध नहीं है तो इंतजार करना होगा। हालांकि, अब अधिकारी और वैज्ञानिक वैक्सीन मिक्सिंग के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। एम्स के चीफ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना के ज्यादा एग्रेसिव डेल्टा और डेल्टा प्लस जैसे वैरिएंट के खिलाफ लड़ने के लिए वैक्सीनों की मिक्सिंग एक ऑप्शन हो सकती है। उन्होंने कहा कि ये निश्चित तौर पर एक रास्ता हो सकता है, लेकिन इस पर किसी फैसले से पहले हमें और डेटा की जरूरत होगी।

पिछले महीने सरकार ने भी कहा था कि वह वैक्सीनों के मिश्रण के विकल्प पर विचार कर रही है। नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा था कि म्यूटेटेड वैरिएंट से सुरक्षा और वैक्सीन की कवरेज बढ़ाने के लिए हम ये कदम उठा सकते हैं। इस पर टेस्ट के नतीजे कुछ महीनों में आने की उम्मीद है।

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