स्वावलंबन सेमिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच बड़ी बातें।

The Bihar Today News
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सोमवार को एन आई आई ओ द्वारा आयोजित स्वावलंबन सेमिनार में पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर हो रहा है उन्होंने बताया कि यह नया भारत है नए भारत में हम डिफरेंस एक्सपोर्ट में भी तरक्की कर रहे हैं।

स्वावलंबन सेमिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच बड़ी बातें।

हथियारों को एक्सपोर्ट करने में प्राइवेट सेक्टर का अहम योगदान

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले 8 साल में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 7 गुना बड़ा है पिछले साल देश ने 13000 करोड़ रुपए के हथियार निर्यात किए इसमें कुल 70 प्रतिशत योगदान निजी सेक्टर का था।

आजादी के 120 साल में भारतीय नौसेना नई ऊंचाइयां छूएगी।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय नेवी नई तकनीक के दम पर आत्मनिर्भर हो रही है देश जब अपनी आजादी की एक सभा सालमन आएगा उस समय भारत के नौसेना अभूतपूर्व ऊंचाई पर होगी देश की बढ़ती जरूरतों के लिए नौसेना का स्वावलंबन जरूरी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब हम डिफेंस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भविष्य की चर्चा कर रहे हैं तब यह भी आवश्यक है कि बीते दशकों में जो हुआ उससे सबक लें। इससे हमें भविष्य का रास्ता बनाने में मदद मिलेगी। आज जब हम पीछे देखते हैं तो हमें अपनी समृद्ध मेरिटाइम हेरिटेज के दर्शन होते हैं। भारत का समृद्ध ट्रेड रूट इस विरासत का हिस्सा रहा है। हमारे पूर्वज समुंद्र पर वर्चस्व इसलिए कायम कर पाये क्योंकि उन्हें हवा की दिशा और अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में बहुत अच्छी जानकारी थी।

फिर हासिल करेंगे पुराना गौरव

पीएम मोदी ने कहा कि भारत का डिफेंस सेक्टर आजादी के पहले भी काफी मजबूत था। आजादी के समय देश में 18 ऑर्डिनेंस फैक्ट्री थी। यहां तोप समेत कई तरह के सैन्य साजो-सामान बनाये जाते थे। दूसरे विश्व युद्ध में रक्षा उपकरणों के हम अहम सप्लायर थे। हमारे हॉवित्जर तोपों को उस समय सबसे अच्छा माना जाता था। हम बहुत बड़ी मात्रा में हथियारों को एक्सपोर्ट करते थे, लेकिन फिर ऐसा क्या हुआ कि हम इस क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े इम्पोर्टर बन गए। दुनिया जिन हथियारों का इस्तेमाल कर रही हो उसी का इस्तेमाल बुद्धिमानी नहीं है।

रिसर्च की ओर ध्यान नहीं दिया न नई फैक्ट्रियां बनाईं

पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद के पहले डेढ़ दशक में हमने नई फैक्ट्रियां बनाई ही नहीं। पुरानी फैक्ट्रियां अपनी क्षमता खोती गईं। 1962 के युद्ध के बाद मजबूरी में नीतियों में कुछ बदलाव हुआ, लेकिन इसमें भी रिसर्च, इनोवेशन और डेवलपमेंट पर बल नहीं दिया गया। दुनिया उस समय नई टेक्नोलॉजी और नए इनोवेशन के लिए प्राइवेट सेक्टर पर भरोसा कर रही थी, लेकिन दुर्भाग्य से रक्षा क्षेत्र को सीमित सरकारी संसाधनों के दायरे में रखा गया। भारतीय सेना को राइफल जैसे सामान्य हथियार के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ा।

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